Category Archives: Uncategorized

‘यूपी के लड़को’ की उम्र के बीच फंस गया मैं- योगी

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ पहली बार मंगलवार को दिल्ली पहुंचे। जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात करने के बाद योगी आदित्यनाथ लोकसभा भी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी जहां चुनाव हुए हैं लोग मोदी को सीएम के तौर पर सामने रखते हैं। लोग भारत से विकास का ढांचा देखने और समझना चाहते हैं। योगी ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि मैं पीएम और अपनी पार्टी का आभारी हूं।

योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं आदरणीय राहुल जी से एक साल छोटा हूं और उम्र में अखिलेश से एक साल बड़ा हूं। मैं दोनों की जोड़ी के बीच में जो आ गया यही आप की विफलता का बड़ा कारण हो सकता है। योगी ने इस दौरान संसद में मौजूद सभी सांसदों और मंत्रियों को यूपी आने के लिए आमंत्रित किया। योगी ने कहा कि आने वाले समय में यूपी दंगा मुक्त, गुंडागर्दी मुक्त प्रदेश बनेगा। मैं सभी सासंदों को यूपी में आने के लिए आमंत्रित करता हूं। हम विकास का ऐसा मॉडल देंगे कि वहां के युवाओं को पलायन नहीं करना पड़ेगा। आप देखते रहिएए बहुत कुछ बंदी होने जा रही है। बहुत कुछ बंद होने जा रहा है।

संसद में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मोदी सरकार गरीबों के लिए काम करने वाली सरकार है। यह सरकार जातिए धर्म देखे बिना विकास कर रही है। यूपी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के सपनों का प्रदेश होगा। उन्होंने कहा कि पहले पूर्वांचल के विकास के लिए हमारी बातें नहीं सुनी जाती थी। पूर्वी यूपी बुरी तरह से पिछड़ा हुआ था। गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि पिछले तीन साल में देश की अर्थव्यवस्था काफी तेजी से बढ़ी है।

आदित्यनाथ योगी ने आगे कहा कि विकास का ढांचा कैसा होना चाहिए आज दुनिया भारत से सीखती है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों में उत्तर प्रदेश में 300 से ज्यादा दंगे हुए लेकिन हमनें पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक भी दंगा नहीं होने दिया। केंद्र सरकार की जनधन योजना को आदित्यनाथ योगी ने गरीबों की योजना बताई। इसके अलावा अपने भाषण में उन्होंने पीएम द्वारा नवंबर में की गई नोटबंदी की भी सराहना की।

Advertisements

डोरमैट पर तिंरगा देख भड़की सुषमा स्वराज, अमेजॉन को माफी मागंने की दी चेतावनी

sushma-swaraj

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमेजन कनाडा पर तिरंगा की तस्वीर वाली डोरमैट (पायदान) बेचे जाने पर सख्त ऐतराज जताया है। उन्होंने ट्वीट्र के माध्यम से इस मामले को संज्ञान में लिया और ट्वीट कर अपने गुस्से का इजहार किया। विदेशमंत्री ने अमेजन से तुरंत प्रभाव से इसकी बिक्री पर रोक लगाया जाये और उन्होंने कंपनी से बिना शर्त माफी मांगने को भी कहा हैं।

दरअसल, अमेजन कंपनी कई दिनों से कनाडा में आॅनलाइन भारतीय तिरंगा की तस्वीर वाली डोरमैट (पायदान) बेच रही हैं। लेकिन बुधवार को एक व्यक्ति ने सुषमा स्वराज को एक ट्वीट कर पूरे मामले की जानकारी दी । जिसके बाद स्वराज ने तुरंत कनाडा में रह रहे भारतीय उच्चायोग को पूरे मामले को जल्द से जल्द खत्म करने को कहा। उन्होंने ने एक अन्य ट्वीट् कर कंपनी से बिना शर्त माफी मागंने को भी कहा हैं ।

विदेश मंत्री ने एक अन्य ट्वीट् कर कंपनी से भारतीय झंडे का अपमान करने वाली सभी उत्पादों को वापस लेने को कहा हैं । साथ ही उन्होंने कहा कि अगर कंपनी ने ऐसा नहीं किया तो कंपनी के सभी अफसरों को भारतीय वीजा नहीं मिलेगा और पहले से जारी किया हुआ वीजा भी रद्द कर दिया जायेगां।

notebandi upset common people not blackmoney people .

“नोटबंदी से जनता परेशान या कालाधन वाले ” ?

 सरकार ने पाँच सौ और एक हजार के नोट बंद कर कालाधन वालो को जोरदार झटका दिया , और साथ ही देश की अर्थव्यवस्था  को  भी मजबूत किया।

तारीख -8/11/2016  , समय 8:00 pm प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन का कार्यक्रम , सबको लगा सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी लगातार होते सीजफायर और शहीद होते सैनिक के लिए सरकार पाकिस्तान को और मजबूत जवाब देगी , लेकिन समय ,तारीख सब वही लेकिन , पाकिस्तान के खिलाफ हुई सर्जिकल स्ट्राइक को देश के प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 के नोटों पर कर दिया।  इस अचानक हुई स्ट्राइक के कारण लोगो को कुछ समझ आता ,तब तक वह चार घंटे बीत चुके थे जो उन्हें मोहलत के लिए मिले थे।  चार घंटे के बाद जो देशभर में परेशानी हुई उसे हम सब ने टी.वी , न्यूज़पेपर , सोशल मीडिया पर देखा।

                                                                  कालेधन पर हमेशा सरकार को घेरने वाले विपक्ष को सरकार ने कुछ हद तक जवाब दे दिया , लेकिन देश के बाहर वाले कालेधन पर सरकार बैकफुट पर है।
इस तरह अचानक बंद हुए 500 ,1000 के नोटों ने लोगो को मुश्किल में डाल दिया है , प्रधानमंत्री ने रात के 8 बजे घोषणा किया और 9 बजे वित्त सचिव , RBI की संयुक्त हुई प्रेसवार्ता ने लोगो को सरकार की करवाई को अच्छी तरीके से मीडिया के माध्यम से लोगो को बताया।

नोटबंदी के इस कारवाई को लेकर सरकार ने बहुत अच्छी गोपनीयता बरती जिस के लिए सरकार की तारीफ होनी चाहिए , नोटबंदी को लेकर केवल प्रधानमंत्री ,वित्त मंत्री, RBI के उच्च अधिकारी , वित्त सचिव , और कुछ कैबिनेट मिनिस्टर के अलावा किसी को कुछ नही पता।  इस तरह की करवाई से सरकार की ईमानदारी वाली तस्वीर तो जरूर झलकती है ,

              मोराजी देसाई की जनता सरकार ने1000, 5000 के नोट बंद के बाद मोदी सरकार ने 500-1000 के नोट बंद किया। बस फर्क इतना है , की 5000 की नोट हमेशा के लिए बंद हो गयी और 500-1000 के नोट हमेशा के लिए नही।

        अब प्रश्न उठता है ,की सरकार के कार्यकाल के दूसरे ही साल बाद सरकार ने जो कदम उठाया है , वह कदम कई सरकारे अपने पुरे कार्यकाल में नही उठा पाती है।  पहले तो ” fare and lovely ”  योजना मतलब कालेधन या आघोषित धन को घोषित कर 40% टैक्स भर कर अपना पैसा सफेद कर लो , और अब 500 -1000 के नोट बंद।

                                      दरसल मुझे लगता है , इसके पीछे तीन कारण है –

1 . चुनाव के समय सबसे बड़े मुद्दों में से एक कालाधन – जिसके खिलाफ सरकार जनता को दिखाना चाहती है की वह कालेधन को लेकर अपना वादा नही भूली है।

2 . जो चुनाव के समय जनता को बड़े – बड़े सपने या घोषणा की गयी उसे पूरा करने के लिए सरकार को अधिक धन की जरुरत है।

3 . सरकार कालेधन के वजह से बढती मंहगाई , बेरोजगारी , बिगड़ती अर्थव्यवस्था , अमीर के और अमीर होने , गरीब के और गरीब होने के कारण उठाया गया कदम।

            यह तीनो ही कारण कही न कही सरकार के भी सोच में रही होगी।  सरकार ने नोटबंदी से होने वाली परेशानियों के लिए जनता से सहयोग मांगा है , और जनता पूरी तरह से कालेधन के खिलाफ सरकार के साथ है।  लेकिन किया नोटबंदी को लेकर सरकार ने पूरी तैयारी कर ली थी या जल्दबाजी में यह फैसला लिया गया।

                                 क्योकि अगर सरकार ने तैयारी की होती तो , जो ATM में 2000 , 500 के नए स्लॉट लगाए जा रहे है वह कुछ दिनों पहले ही हो जाते।  जो बैंको और पोस्ट ऑफिसो में इतनी भीड़ है।  वह नही होती अगर सरकार चुनाव के समय बनाये जाने वाले पोलिंग बूथ की तरह ही हर क्षेत्र में बूथ बनाती और इन बूथों से भी लोगो को [पैसे देती जिससे ,की यह लाइने इतनी लंबी नही होती। 

“What make in india – made by china will counter?”.

“क्या make in india – made by china को टक्कर देगी “?.    हमारे देश का पुराना नारा — ” हिंदी चीनी भाई -भाई ” , और नये ज़माने का नारा — “चीनी समान खरीद…

Source: “What make in india – made by china will counter?”.

“What make in india – made by china will counter?”.

 “क्या make in india – made by china को टक्कर देगी “?. 

 
हमारे देश का पुराना नारा — ” हिंदी चीनी भाई -भाई ” , और नये ज़माने का नारा — “चीनी समान खरीदो मत भाई “  
       जी हाँ , भारत और चीन पाकिस्तान के अलग होने के बाद सबसे अच्छे मित्र थे , हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री तो चीन के बहुत बड़े मुरीद थे , कि वह चीन पर इतना विश्वास करते थे की चीन सेना के भारत सीमा में घुस कर अपने टेंट लगाने के बाद भी उन्होंने कोई कदम नही उठाया , जिसका फल स्वरूप हमें अपना हिस्सा चीन को देना पड़ा।  खैर हमारे पूर्वजो ने उस समय में जो कर सकते थे , वह उन्होंने किया ,  क्योकि उस समय हमारा देश बेहद गरीब , बेरोजगार , भूखमरी से ग्रसित था और छोटी सी सैन्य ताकत से कुछ भी नही किया जा सकता था।  

                लेकिन हम भारतीयों की इच्छा-शक्ति ही थी की आज भारत ,  चीन समेत सभी विकसित देशो को कड़ी टक्कर दे रहा है।  भारत आज हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है , और उसे सफलता भी मिल रही है। 

                                     लेकिन आज -कल हमारे नए मीडिया मतलब सोशल मीडिया पर जो मोदीजी का फोटो लगाकर एक विनम्र अपील वाली फोटो वायरल हो रही है यह फोटो अब देश का मुद्दा बन गया है।  

             आखिर फोटो में है क्या ? लोग इस फोटो को क्यों इतना शेयर कर रहे है।  दरसल इस फोटो में लोगो  से चीनी समान दीपावली पर नही खरीदने की अपील की जा रही है ताकि चीन को पाकिस्तान का साथ देने को सबक दिया जा सके।  यह बहुत अच्छी अपील है, क्योकि चीनी समान एक तो बहुत ख़राब क्वालिटी का होता है  और दूसरा देश का पैसा देश में रहे।    
   लेकिन सोचने योग्य बात यह है की गरीब लोग या वह लोग जो भारतीय समान( जिसका मूल्य चीनी समान से ज्यादा है ) वह लोग क्या करेगे ? या तो उनके लिए सस्ते दर पर समान दिया जाये , दुसरा इस अपील को पाच – छ महीने पहले वायरल करना था ताकि दुकानदार जिन्होंने चीनी समान खरीद लिया वह न खरीदते।  
                                     made-in-india  क्या भारत सरकार को खराब क्वालिटी वाले चीनी समान को भारत में प्रतिबंद नही कर देना चाहिए ? जैसा की  दूसरे देश करते है , यह कुछ बुनियादी बाते है , जिन पर ध्यान देना चाहिए।  खैर देर सही लेकिन शुरुआत हो हुई और अगर शुरुआत हुई है , तो यह अपने मुकाम तक जरूर पहुचेगी।  सफर लंबा है , कठिन है, चुनोतियो से भरा है, लेकिन हम भारतवासियो का द्रढ़निश्चय तो सौ साल पहले भी पुरे विश्व ने देखा था , और इस अभियान को भी चीन सहित पूरा विश्व देखेगा।  

भारत और पाकिस्तान के बीच बिगड़ते रिश्ते

  बॅटवारे के बाद से ही दोनों देशो के रिश्ते ख़राब होने लगे थे लेकिन उरी हमले के घाव और भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तो को और अधिक जटिल बना दिया है 

सन 1947 में बॅटवारे के समय भारत से अलग हुआ हिस्सा जो बाद में पाकिस्तान बना उस अलगाव के समय किसी ने सोचा भी नही था ,की घर के बॅटवारे में अलग हुआ हिस्सा पाकिस्तान आज हमारा सबसे बड़ा दुश्मन बनेगा।  पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते समय -समय पर बनते और बिगड़ते रहे।  भारत की हर सरकार ने पाकिस्तान के साथ समय -समय पर संबंध मजबूत करने की कोशिश की लेकिन हर बार पाकिस्तान ने भारत के साथ विश्वासघात हुआ।

                                    अगर बात करे मौजूदा सरकार के समय की सबसे बड़ी आतंकवादी घटना की तो हमें उरी हमला सबसे पहले याद आता है , आये भी क्यों नही इस घटना में हमारे देश  के 18 सैनिक जो शहीद हुए।  सरकार पर बढ़ते दवाब और लगातार बैठको के दौर का नतीजा भारतीय सेना द्वारा पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर 38 आतंकवादी और दो पाकिस्तानी सैनिको को भी मार गिराया।  भारतीय सेना का पाकिस्तान में यह पहला सर्जिकल स्ट्राइक था , तो भारत सरकार ने यह बात देश के राष्ट्पति , जम्मू -कश्मीर के गवर्नर , मीडिया , राजनीतिक पार्टियों , एवं सभी प्रदेशो के मुख्यमंत्रियो को भी सूचित किया। 

    इन सब घटना के बाद आखिर सवाल उठता है, की विभाजन के इतने सालो के बाद भारत ने पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक क्यों किया ?. तीन बार युद्ध करने के बावजूद और भारत पर सबसे बड़ा आंतकी हमला 26/11 के बाद भी सरकार और सेना में सर्जिकल स्ट्राइक नही किया , तो फिर उरी हमले के बाद क्यों ?

                               यह प्रश्न पेचीदा इसलिए है क्यों कि , इस तरह के हमलो से पहले देशभक्ति, राजनीतिक इच्छाशक्ति, और बदला लेना का जूनून होनी चाहिए। अब प्रश्न उठता है,की क्या हमारे देश की मौजूदा सरकार की इच्छाशक्ति देश की पुरानी सरकारों से आतंकवाद और पाकिस्तान के लिए ज्यादा है ? यह फिर मौजूदा सरकार ने चुनाव के समय जो देश से बड़े -बड़े वादे किये थे उसके दवाब में यह किया ?

                इस प्रश्न का उत्तर तो लोगो के विचारो पर निर्भर करता है ,की लोग क्या सोचते है , खैर सर्जिकल स्ट्राइक कर भारत ने सैन्य क्षमता का उदाहरण पुरे विश्व को दे दिया।  अब देखना यह है ,कि भारत सरकार कूटनीति के द्वारा पाकिस्तान को कैसे विश्व में अलग-थलग करता है।  हम सब को पता है की पुरे एशिया में चीन को छोड़कर सभी देश भारत के साथ खड़े है।  लेकिन क्या भारत चीन को मनाकर संयुक्त राष्ट में पाकिस्तान को आतंक राष्ट घोषित करने का प्रयास करेगा ? 

सर्जिकल स्ट्राइक पर हमारे देश के नेताओ को संदेह क्यों ?

पीओके में 28 तारीख को हुए सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जहाँ भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित देश घोषित करने के लिए अपने पक्ष को मजबूत कर लिया है, और जो आतंकवादी बॉर्डर से भारत में घुसने वाले थे वह सब आतंकवादी डर के कारण बॉर्डर से पाकिस्तान में वापस भाग गये।

       जिस कार्यवाही से पाकिस्तान की सेना इतनी भयभीत हुई की उसने अपनी 5 बटालियन जिसमे की 600-900 सैनिक होते है ,उन सब ने बॉर्डर की ओर कूच किया। जिस कार्यवाही के बाद वहाँ की सरकार ने एक दिवसीय संसद केवल भारत के द्वारा की गयी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बात करने के लिए बुलाई।  जिस पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की बात सुनकर वहां के नेता अपनी मर्यादा से ज्यादा खराब शब्दो का उपयोग भारत के खिलाफ कर रहे है , वहां के मीडिया पाकिस्तान के मिसाइलो और सैन्य ताकत के बारे में दिन रात रिपोर्ट दिखा रही है , जिसमे वह बता रहे है ,की उनकी अलग -अलग दूरी  (जैसे 1000 ,2000 ,3000 ) की मिसाइल के निशाने भारत के अलग अलग शहरो का नाम लेकर बता रहे है और वह बार -बार परमाणु बम की भी धमकी दे रहे है।

                                    पाकिस्तान इतने उतावलेपन में बयान दे रहा है जैसे वह भारत को भूटान या नेपाल समझ रहा है। पाकिस्तान भूल गया की बड़ा भाई हमेशा बड़ा होता है और छोटा हमेशा छोटा रहता है।  पाकिस्तान की सरकार भूल गई कि जिस परमाणु बम की बात वह कर रही है वह भारत ने पाकिस्तान से कई सालो पहले ही इजात कर ली थी , और  पाकिस्तान की कुल मिसाइलो की दूरी जोड़ ले तो भारत के केवल अग्नि 4 की दुरी उनसे कही ज्यादा है।

                 खैर परायो की बात छोड़ हमें अपने देश देश के बात इस समय करनी चाहिए क्यों कि हमें दुसरो को देखकर काम नही करना चाहिए या उनकी बातो को नही मानना चाहिए क्यों की उनका काम है की सर्जिकल कारवाई को दुनिया के सामने झूठा साबित करे लेकिन हमारा काम है की सेना द्वारा की गयी कारवाई को समर्थन करना और कूटनीति के द्वारा विश्व को अपनी क्षमता और पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करना चाहिए।

              

  यह  हमारे  देश  की  विडम्बना  है, की  नेता हर मुदे पर एक -दूसरे को कोसते ,बुराई करते -करते देश की सुरक्षा के मुद्दे पर भी बोलने लगे है।उन्हें सेना पर भी विश्वास नही ,इसलिए तो वह सबूत मांगने लगे है.सेना ने जब प्रेसवार्ता कर पुरे कारवाई को देश को बता दिया तो फिर सबूत क्यों?.

                अगर हम सोचे ,कि नेता सबूत क्यों मांग रहे है , इस सर्जिकल स्ट्राइक का इतना शोर क्यों ,क्या राजनीतिक फायदे के लिए ?

    शायद हा या ना , इस प्रश्न को उत्तर तो वोटर चुनाव के समय बता देगी लेकिन क्या इससे पहले सेना ने कोई ऐसी कारवाई नही की अगर हा तो जनता को बताया क्यों नही या तत्कालीन सरकार ने इसकी मंजूरी नही दी या सरकार व सेना चाहते नही थे की देश या विश्व को भारतीय सेना की क्षमता के बारे में नही बताना चाहते थे , बरहाल कुछ भी हुआ हो लेकिन उस समय कभी इतना प्रचार नही हुआ , जितना की आज हो रहा है।

         बढ़ते राजनीतिक माहौल के बीच सर्जिकल स्ट्राइक पर बहस और भी बढ़ गई है , और विपक्षी पार्टियों को डर है , की सरकार कही इसका फायदा आगामी 5 राज्यो के चुनाव में ना ले ले।  इसलिए सभी ने सरकार  पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

                                        लेकिन सोचने योग्य केवल एक बात है ,की जनता को क्या सर्जिकल स्ट्राइक से मतलब है या उसे भी सबूत चाहिए , इस प्रश्न को उत्तर तो जनता चुनाव के समय ही देगी।